Kisan Policy Team (जुलाई 2026): भारतीय कृषि अब पारंपरिक शारीरिक श्रम और बैलों की खेती से आगे बढ़कर आधुनिक मशीनीकरण (Modern Farming) के युग में प्रवेश कर चुकी है। आज के समय में सही कृषि यंत्रों का उपयोग न केवल खेती की लागत को कम करता है, बल्कि कम समय में रिकॉर्ड पैदावार देने में भी मदद करता है। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों (Small & Marginal Farmers) के लिए आधुनिक और महंगे कृषि उपकरण जैसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, लेज़र लैंड लेवलर और ड्रोन खरीदना आर्थिक रूप से एक बहुत बड़ी चुनौती होती है।
किसानों की इसी समस्या को दूर करने और देश के कोने-कोने तक आधुनिक कृषि तकनीकों को पहुँचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (Sub-Mission on Agricultural Mechanization – SMAM) योजना चलाई जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत किसान भाइयों को खेती की विभिन्न मशीनों पर 40% से लेकर 80% तक की भारी सब्सिडी (Subsidy on Agricultural Machinery) प्रदान की जाती है।
सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना क्या है?
सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक अत्यंत कल्याणकारी योजना है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में ‘कृषि यंत्रीकरण’ (Farm Mechanization) को बढ़ावा देना है, विशेषकर उन राज्यों और क्षेत्रों में जहाँ कृषि मशीनों की उपलब्धता बहुत कम है।
इस योजना के तहत सरकार दो तरीके से काम करती है:
- व्यक्तिगत किसानों को मदद: यदि कोई किसान अपने निजी उपयोग के लिए मशीन खरीदना चाहता है, तो उसे भारी वित्तीय सहायता (सब्सिडी) दी जाती है।
- कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHCs) की स्थापना: गांवों में छोटे और गरीब किसानों को किराए पर मशीनें उपलब्ध कराने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और हाई-टेक हब स्थापित किए जाते हैं, जिन पर 80% तक की भारी वित्तीय छूट मिलती है।
SMAM योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी का पूरा गणित (Subsidy Structure)
SMAM योजना के तहत वित्तीय सहायता को बहुत ही पारदर्शी तरीके से वर्गीकृत किया गया है ताकि समाज के सबसे कमजोर और जरूरतमंद किसान को इसका अधिकतम लाभ मिल सके:
- छोटे, सीमांत, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) और महिला किसान: इन श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले किसान भाइयों और बहनों को कृषि उपकरणों के खरीद मूल्य पर 50% से 60% तक की सब्सिडी दी जाती है।
- सामान्य श्रेणी के बड़े किसान: सामान्य वर्ग के अन्य किसानों को उपकरणों पर 40% की वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
- कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) की स्थापना: यदि कोई किसान समूह, सहकारी समिति या किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिलकर गांवों में कृषि यंत्र बैंक या कस्टम हायरिंग सेंटर खोलता है, तो उसे सरकार की तरफ से 40% से 80% तक की बम्पर सब्सिडी मिलती है (अधिकतम ₹10 लाख से ₹40 लाख के प्रोजेक्ट पर)।
SMAM योजना के अंतर्गत आने वाले मुख्य कृषि यंत्र (Types of Machines)
इस योजना का दायरा बहुत व्यापक है। इसमें बुवाई से लेकर फसल कटाई और अवशेष प्रबंधन (Stubble Management) तक के लगभग सभी छोटे-बड़े यंत्रों को शामिल किया गया है:
1. ट्रैक्टर और जुताई के उपकरण (Tractors & Tillage Implements)
- मिनी और बड़े ट्रैक्टर: 15 HP से लेकर 50 HP+ तक के सभी प्रमाणित ट्रैक्टरों पर श्रेणीवार सब्सिडी।
- रोटावेटर (Rotavator) और कल्टीवेटर (Cultivator): मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ बनाने वाले यंत्र।
- पावर टिलर (Power Tiller): छोटे और संकरे खेतों के लिए सबसे उपयुक्त।
2. बुवाई और रोपाई की मशीनें (Sowing & Planting Equipment)
- सुपर सीडर (Super Seeder) और हैप्पी सीडर (Happy Seeder): धान की पराली जलाए बिना सीधे गेहूं की बुवाई करने के लिए।
- पैडी ट्रांसप्लांटर (Paddy Transplanter): धान की लाइनों में सटीक और तेज रोपाई करने वाली स्वचालित मशीन।
- सीड ड्रिल (Seed Drill): बीजों को सही गहराई और दूरी पर बोने के लिए।
3. फसल सुरक्षा और कटाई के आधुनिक यंत्र (Harvesting & Protection Tools)
- कृषि ड्रोन (Kisan Drones): खेतों में कीटनाशकों और नैनो यूरिया के 100% सटीक और सुरक्षित छिड़काव के लिए।
- मल्टी क्रॉप थ्रेशर (Thresher) और कम्बाइन हार्वेस्टर (Combine Harvester): फसलों की तेजी से कटाई और मड़ाई के लिए।
- लेज़र लैंड लेवलर (Laser Land Leveller): खेत को एक सेंटीमीटर की सटीकता से समतल कर 30% तक पानी बचाने के लिए।
योजना के लिए अनिवार्य पात्रता और शर्तें (Eligibility Criteria)
सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना आवश्यक है:
- भारतीय नागरिकता: आवेदक भारत का स्थायी निवासी और मूल रूप से एक किसान होना चाहिए।
- भूमि का मालिकाना हक: किसान के पास अपने नाम पर खेती योग्य भूमि (Land Holding) होनी चाहिए, जिसका विवरण खतौनी में दर्ज हो।
- लक्षित प्राथमिकता: देश के छोटे, सीमांत, महिला किसानों और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (SC/ST) को लॉटरी या चयन प्रक्रिया में पहली प्राथमिकता दी जाती है।
- समयावधि का नियम: यदि किसी किसान ने पिछले 3 से 5 वर्षों के भीतर किसी सरकारी योजना के तहत उसी कृषि यंत्र पर सब्सिडी का लाभ लिया है, तो वह उस विशिष्ट यंत्र के लिए दोबारा पात्र नहीं होगा।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Important Documents)
आवेदन प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए किसान भाई पहले से ही इन कागजातों को तैयार रखें:
- आधार कार्ड: आवेदक किसान का पहचान पत्र।
- जमीन के कागजात: भूलेख रिकॉर्ड जैसे कि वर्तमान वर्ष की प्रमाणित खतौनी या खसरा नंबर।
- बैंक पासबुक की कॉपी: सब्सिडी की राशि सीधे किसान के खाते में भेजने के लिए (डीबीटी हेतु बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है)।
- पहचान एवं श्रेणी प्रमाण पत्र: वोटर आईडी कार्ड और आरक्षित वर्ग के लिए जाति प्रमाण पत्र (SC/ST किसानों के लिए)।
- पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर: आधार कार्ड से लिंक चालू मोबाइल नंबर ताकि ओटीपी (OTP) प्राप्त हो सके।
SMAM योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Application Guide)
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। किसान भाई अपने मोबाइल से या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर नीचे दी गई प्रक्रिया के अनुसार आवेदन कर सकते हैं:
1.आधिकारिक पोर्टल पर जाएं:
सबसे पहले सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन की आधिकारिक केंद्रीय वेबसाइट agrimachinery.nic.in पर जाएं। (उत्तर प्रदेश के किसान सीधे https://upyantratracking.in/ पोर्टल पर ‘यंत्रों पर अनुदान हेतु बुकिंग’ लिंक का भी उपयोग कर सकते हैं)।

2.किसान पंजीकरण (Registration) करें:
होमपेज पर दिए गए “Registration” ड्रॉपडाउन मेनू में जाकर “Farmer” के विकल्प पर क्लिक करें। अपना राज्य, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करके ओटीपी (OTP) के जरिए खुद को रजिस्टर करें।
3.व्यक्तिगत और भूमि का विवरण भरें:
लॉगिन करने के बाद अपना पूरा नाम, पता, बैंक खाता संख्या (IFSC कोड सहित) और अपनी खेती की जमीन का सटीक विवरण (खसरा/खाता संख्या) सावधानीपूर्वक भरें।
4.कृषि यंत्र का चयन और दस्तावेज अपलोड करें:
आप जिस कृषि मशीन (जैसे रोटावेटर या मिनी ट्रैक्टर) पर सब्सिडी चाहते हैं, उसका चयन सूची में से करें। इसके बाद मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों (खतौनी, आधार, बैंक पासबुक) की स्कैन कॉपी को सही फॉर्मेट में अपलोड करें।
5.आवेदन सबमिट करें और रसीद सुरक्षित रखें:
पूरी जानकारी को एक बार दोबारा जांच लें (Preview) और ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें। इसके बाद आपको एक एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर (Reference ID) प्राप्त होगा। इस रसीद का प्रिंटआउट निकालकर अपने पास भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।
जिला कृषि कार्यालय और फिजिकल वेरिफिकेशन (Verification Process)
ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद की प्रक्रिया भी बहुत महत्वपूर्ण होती है, जिसे जानना हर किसान के लिए बेहद जरूरी है:
- पात्रता की जांच: आपके ब्लॉक और जिले के सहायक कृषि निदेशक (Deputy Director of Agriculture) का कार्यालय आपके दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करता है।
- लॉटरी या चयन सूची: यदि किसी जिले में लक्ष्य से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पारदर्शी ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली या ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर किसानों का चयन किया जाता है।
- मशीन की खरीद: चयन होने के बाद किसान को विभाग द्वारा पंजीकृत और प्राधिकृत डीलर (Authorized Dealer) से ही वह कृषि यंत्र पूरे मूल्य पर खरीदना होता है। मशीन का पक्का जीएसटी (GST) बिल आपके नाम पर होना चाहिए।
- फिजिकल वेरिफिकेशन: मशीन खरीदने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी आपके खेत पर आकर मशीन का भौतिक सत्यापन करते हैं, उसकी तस्वीर लेते हैं और मशीन पर लगे यूनिक सीरियल नंबर या चेसिस नंबर को पोर्टल पर दर्ज करते हैं।
- सब्सिडी का भुगतान (DBT): सत्यापन के सफल होने के 15 से 30 दिनों के भीतर सरकार द्वारा स्वीकृत की गई सब्सिडी की राशि सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक खाते में Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाती है।
भारतीय कृषि पर SMAM योजना के दूरगामी प्रभाव
इस योजना ने भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि परिदृश्य को पूरी तरह से बदलने का काम किया है:
- उत्पादकता में वृद्धि: आधुनिक सीड ड्रिल और पडलिंग मशीनों के उपयोग से फसलों की बुवाई और रोपाई का समय 60% तक कम हो गया है, जिससे फसल चक्र को समय पर पूरा करने में मदद मिलती है।
- युवाओं के लिए रोजगार का अवसर: गांवों के शिक्षित बेरोजगार युवा इस योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर खोलकर खुद का एक बेहतरीन व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। वे अन्य छोटे किसानों को कम किराए पर मशीनें देकर प्रति माह ₹40,000 से ₹60,000 तक की शानदार कमाई कर रहे हैं।
- पर्यावरण संरक्षण: इन-सीटू (In-situ) उपकरणों जैसे हैप्पी सीडर पर भारी सब्सिडी देकर सरकार ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में बड़े पैमाने पर कमी लाने में सफलता पाई है।
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SMAM योजना से जुड़े मुख्य सवाल-जवाब (FAQs)
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क्या एक किसान इस योजना के तहत एक साथ कई कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकता है?
हाँ, एक किसान भाई अलग-अलग कृषि यंत्रों के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन सरकारी नियमों के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में सामान्यतः एक किसान को अधिकतम दो अलग-अलग प्रकार के उपकरणों पर ही अनुदान (सब्सिडी) स्वीकृत किया जाता है, ताकि जिले के अन्य किसानों को भी योजना का समान लाभ मिल सके।
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कृषि यंत्रों की खरीद के लिए क्या सरकारी डीलर का होना अनिवार्य है, या हम किसी भी दुकान से मशीन खरीद सकते हैं?
सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आपको केवल उन्हीं निर्माताओं या डीलरों से कृषि यंत्र खरीदना होगा जो कृषि विभाग के पोर्टल (upyantratracking.in) पर पंजीकृत और स्वीकृत हैं। किसी भी गैर-पंजीकृत स्थानीय दुकान से खरीदी गई मशीन पर सरकार द्वारा कोई सब्सिडी नहीं दी जाएगी, और मशीन का बिल पूरी तरह से वैध व जीएसटी (GST) युक्त होना चाहिए।
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कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) योजना क्या है और इस पर 80% सब्सिडी कैसे मिलती है?
यह योजना छोटे किसानों के समूहों या सहकारी समितियों (जैसे FPOs) के लिए है। यदि 4 से 5 किसान मिलकर लगभग ₹10 लाख का एक कृषि यंत्र बैंक (जिसमें ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर आदि शामिल हों) स्थापित करते हैं, तो सरकार उन्हें ₹8 लाख तक की भारी सब्सिडी (80%) देती है। इस बैंक की मशीनों को वे गांव के अन्य सीमांत किसानों को बहुत ही कम दरों पर किराए पर देकर व्यवसाय चला सकते हैं।
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ऑनलाइन आवेदन करने के बाद चयन होने की सूचना किसान को कैसे मिलती है?
जैसे ही जिले की लॉटरी या चयन सूची फाइनल होती है, विभाग द्वारा आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस (SMS) के माध्यम से इसकी सूचना भेजी जाती है। इसके अलावा किसान भाई पोर्टल पर जाकर अपनी ‘Application Reference ID’ दर्ज करके भी अपने आवेदन का लाइव स्टेटस चेक कर सकते हैं। चयन होने के बाद मशीन खरीदने के लिए विभाग द्वारा एक निश्चित समय अवधि (आमतौर पर 21 से 30 दिन) का परमिट जारी किया जाता है।

