पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) और बिहार के धान उत्पादक किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताज़ा बुलेटिन के अनुसार, जून के आखिरी सप्ताह में तीव्र गति पकड़ते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून 30 जून 2026 को बिहार के शेष हिस्सों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में पूरी तरह से दाखिल हो चुका है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) और उत्तर-पश्चिम बिहार से बंगाल की खाड़ी तक फैली ट्रफ लाइन के कारण मानसून अब सक्रिय चरण (Active Phase) में है। आने वाले 3 से 4 दिनों (जुलाई के पहले सप्ताह) में पूर्वांचल और बिहार के अधिकांश जिलों में मध्यम से भारी बारिश की प्रबल संभावना है।
चूंकि जून महीने में अल नीनो (El Niño) के आंशिक प्रभाव के कारण बारिश सामान्य से कम रही थी और हीटवेव का असर देखा गया था, इसलिए मानसून की यह दस्तक धान की नर्सरी (बिचड़ा) और रोपाई के लिए अमृत समान है। (मानसून 2026 अपडेट)
पूर्वी उत्तर प्रदेश (Eastern UP) के किसानों के लिए मौसम का हाल और कृषि सलाह
पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंडलों जैसे बस्ती, गोरखपुर, आज़मगढ़, वाराणसी, और प्रयागराज में मानसून की सक्रियता बढ़ने से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अगले 48 से 72 घंटों में इन क्षेत्रों में अच्छी मानसूनी बारिश का पूर्वानुमान है।
धान के किसानों के लिए ज़रूरी रणनीतियाँ:
- ओवर-एज नर्सरी का प्रबंधन: यदि जून की गर्मी और पानी की कमी के कारण आपकी धान की नर्सरी (पौध) 25 से 30 दिन से अधिक यानी ओवर-एज हो गई है, तो रोपाई करते समय प्रति हिल (एक जगह पर) 3 से 4 पौधे लगाएं। साथ ही, रोपाई से पहले पौधों की पत्तियों के ऊपरी सिरों को थोड़ा काट दें, ताकि वाष्पीकरण कम हो और कल्ले अच्छे फूटें।
- अगेती और मध्यम किस्मों की रोपाई शुरू करें: मानसून के सक्रिय होते ही खेतों में पानी जमा होने लगा है। किसान भाई खेतों की लेह (पडलिंग) तैयार कर सहभागी धान, नरेंद्र 8002, और कालानमक किरण जैसी सूखा-सहनशील व उन्नत किस्मों की रोपाई का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दें।
बिहार (Bihar) के किसानों के लिए मौसम का हाल और कृषि सलाह
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, मानसून की उत्तरी सीमा (NLM) अब बिहार को पूरी तरह पार कर चुकी है। उत्तर बिहार (दरभंगा, मधुबनी, मोतिहारी) के साथ-साथ दक्षिण बिहार (गया, औरंगाबाद, रोहतास) में भी बादलों की आवाजाही के साथ बारिश शुरू हो गई है। 3 जुलाई के आसपास उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र (Low-Pressure Area) बनने की संभावना है, जिससे बिहार में जुलाई के पहले हफ्ते में झमाझम बारिश होगी।
धान के किसानों के लिए ज़रूरी रणनीतियाँ:
- सीधी बिजाई (DSR तकनीक) का आखिरी मौका: दक्षिण बिहार के जिन इलाकों में अभी भी तालाब या नहरों में पानी कम है, वहाँ के किसान बिना देरी किए ‘ड्रम सीडर’ या ‘सीड ड्रिल’ मशीन से धान की सीधी बिजाई (DSR) कर लें। इसके लिए स्वर्ण श्रेया या शुष्क सम्राट किस्में सबसे उपयुक्त हैं। इससे रोपाई की तुलना में 30% पानी और लेबर का खर्च बचेगा।
- जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी: उत्तर बिहार के निचले इलाकों (Lowland Ecosystem) में जहाँ भारी बारिश से जलभराव का खतरा रहता है, वहाँ किसान भाई जल निकास (Drainage) की व्यवस्था दुरुस्त रखें। इन क्षेत्रों में केवल स्वर्ण सब-1 (Swarna Sub-1) या राजेंद्र सब-1 जैसी जल-रोधी किस्मों की ही रोपाई करें, जो पानी में डूबे रहने पर भी नहीं सड़तीं।
मानसून के दौरान धान की रोपाई के 3 अचूक वैज्ञानिक नियम
अधिकतम कल्ले और वजनदार दाने पाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए इन नियमों का पालन ज़रूर करें:
- जिंक सल्फेट का प्रयोग अनिवार्य: पूर्वांचल और बिहार की मिट्टी में जिंक की भारी कमी पाई जाती है। रोपाई के समय आखिरी जुताई में 25 किग्रा जिंक सल्फेट (21%) या 15 किग्रा चिलेटेड जिंक प्रति हेक्टेयर की दर से ज़रूर डालें। यह पौधों को पीला होने (खैरा रोग) से बचाता है।
- दूरी का ध्यान रखें: कतार से कतार की दूरी 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15 सेंटीमीटर रखें। सही दूरी मिलने से पौधों को पर्याप्त हवा और धूप मिलती है, जिससे कीटों का हमला कम होता है।
- यूरिया का सही समय: रोपाई के तुरंत बाद यूरिया का भारी इस्तेमाल न करें। नाइट्रोजन (यूरिया) की पहली टॉप-ड्रेसिंग रोपाई के 20-25 दिन बाद (कल्ले फूटते समय) ही करें।
आगामी 5 दिनों का मौसम पूर्वानुमान: इन जिलों के लिए IMD का ‘येलो और ऑरेंज’ अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure Area) के प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के वायुमंडल में भारी मात्रा में नमी (Moisture) पहुँच रही है। इसके कारण मौसम विभाग ने आगामी 5 दिनों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है:
बिहार के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ (भारी से अत्यधिक भारी बारिश)
बिहार के उत्तर-पूर्वी और तराई वाले जिलों में वज्रपात (आकाशीय बिजली) के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
- प्रमुख प्रभावित जिले: किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, और सीतामढ़ी। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर 7 से 11 सेंटीमीटर तक भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।
- किसानों के लिए सलाह: खेतों में काम करते समय आकाशीय बिजली चमकने पर तुरंत पक्के मकानों या सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। पेड़ों या ट्यूबवेल के खंभों के नीचे कतई न खड़े हों।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए ‘येलो अलर्ट’ (गर्जन के साथ मध्यम बारिश)
पूर्वांचल के जिलों में मानसून की रेखा (Northern Limit of Monsoon) आजमगढ़ और अयोध्या से होते हुए गुजर रही है, जिससे यहाँ ट्रफ लाइन बेहद सक्रिय है।
- प्रमुख प्रभावित जिले: बस्ती, गोरखपुर, संत कबीर नगर, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, बलिया, जौनपुर, और गाजीपुर। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है।
तापमान और आर्द्रता (Humidity) का धान की फसल पर प्रभाव
मानसून के सक्रिय होने से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भारी बदलाव आया है:
- तापमान का गिरना: पिछले हफ़्ते तक जो अधिकतम तापमान 40°C से 43°C के बीच चल रहा था, वह अब गिरकर 30°C से 32°C के बीच आ गया है। धान के छोटे पौधों (नर्सरी) की जड़ों के तेजी से विकास के लिए यह तापमान सबसे आदर्श (Ideal) माना जाता है।
- आर्द्रता में भारी उछाल: हवा में नमी का स्तर (Relative Humidity) अब 85% से 95% तक पहुँच चुका है। इतनी अधिक उमस और नमी के कारण रोपाई किए गए धान के पौधे मिट्टी को बहुत जल्दी पकड़ लेते हैं और उनके झुलसने या सूखने की दर (Mortality Rate) शून्य हो जाती है।
यह भी पढ़ें: क्या है अल नीनो (El Niño) और इसका यूपी के मानसून व खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ता है? जानिए बचाव के उपाय
कृषि वैज्ञानिकों की विशेष चेतावनी: हवा में अत्यधिक नमी और 30°C का तापमान जहाँ धान के विकास के लिए अच्छा है, वहीं यह ‘तना छेदक कीट’ (Stem Borer) और ‘पत्ती लपेटक’ (Leaf Folder) के पनपने के लिए भी अनुकूल होता है। इसलिए किसान भाई अपनी रोपाई के बाद हर 3-4 दिनों में खेतों की निगरानी ज़रूर करते रहें।
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जून में कम बारिश होने के कारण मेरी धान की नर्सरी (बिचड़ा) 35 दिन से ऊपर की हो गई है, क्या अब इसकी रोपाई करना सही है?
हाँ, मानसून के सक्रिय होने पर आप इसकी रोपाई कर सकते हैं, लेकिन थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। चूंकि पौध ओवर-एज (ज्यादा दिन की) हो चुकी है, इसलिए रोपाई करते समय एक स्थान (Hill) पर 3 से 4 पौधे एक साथ लगाएं (सामान्यतः 2 पौधे लगाए जाते हैं)। साथ ही, रोपाई से पहले पौधों की पत्तियों के ऊपरी हिस्से को थोड़ा काट दें, ताकि वे पानी की कमी से झुलसें नहीं और नई जड़ें तेजी से विकसित हो सकें।
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मौसम विभाग के ‘येलो’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट का किसानों के लिए क्या मतलब है?
मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी ‘येलो अलर्ट’ (Yellow Alert) का मतलब है कि मौसम में बदलाव होने वाला है और मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं, इसलिए किसान सतर्क रहें। वहीं ‘ऑरेंज अलर्ट’ (Orange Alert) का मतलब है कि बहुत भारी बारिश और अत्यधिक गरज-चमक (वज्रपात) होने की आशंका है। ऑरेंज अलर्ट के दौरान किसानों को खेतों में जाने से बचना चाहिए और खुले आसमान या पेड़ों के नीचे कतई खड़े नहीं होना चाहिए।
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यदि जुलाई के पहले हफ्ते में बहुत भारी बारिश होती है, तो क्या खेतों में यूरिया का पहला छिड़काव कर देना चाहिए?
बिल्कुल नहीं। धान की रोपाई के तुरंत बाद या बहुत भारी बारिश के दौरान यूरिया (नाइट्रोजन) का छिड़काव करने से खाद पानी के साथ बह जाती है या मिट्टी के बहुत नीचे (Leaching) चली जाती है। यूरिया की पहली टॉप-ड्रेसिंग रोपाई के हमेशा 20 से 25 दिन बाद, जब पौधों में कल्ले (Tillers) फूटने शुरू हों, तभी करनी चाहिए और उस समय खेत में पानी स्थिर होना चाहिए।



