भारत में धान की खेती करने वाले किसान भाइयों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है—फसल में लगने वाली बीमारियां (जैसे झुलसा और ब्लास्ट रोग) और गिरता हुआ उत्पादन। आपकी इसी समस्या को दूर करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) ने धान और बासमती की ऐसी आधुनिक किस्में तैयार की हैं, जो न सिर्फ बीमारियों से लड़ सकती हैं बल्कि कम लागत में जबरदस्त मुनाफा भी देती हैं।
अगर आप इस खरीफ सीजन में धान की सही वैरायटी चुनने को लेकर परेशान हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। आइए जानते हैं ICAR द्वारा विकसित धान की 5 सबसे बेहतरीन और एडवांस किस्मों के बारे में, जो आपके खेत को मुनाफे की खान बना सकती हैं।
धान की 5 सबसे उन्नत और रोग-प्रतिरोधी किस्में (Top 5 ICAR Rice Varieties)
| वैरायटी का नाम | किस राज्य के लिए उपयुक्त | मुख्य विशेषता | औसत पैदावार (टन/हेक्टेयर) |
| पूसा बासमती 1609 | उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब | झोंका रोग (Blast) से पूरी तरह सुरक्षित | 4.60 |
| पूसा बासमती 1728 | पश्चिमी UP, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर | जीवाणु झुलसा (Bacterial Blight) प्रतिरोधी | 4.18 |
| पूसा बासमती 1637 | पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब | ब्लास्ट रोग के खिलाफ सबसे मजबूत | 4.20 |
| पूसा 1592 | पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर | कम समय में बेहतरीन और चमकदार दाना | 4.73 |
| पूसा बासमती 1718 | पंजाब, हरियाणा, दिल्ली | पकने के बाद दाने की लंबाई (17 mm) सबसे ज्यादा | 4.64 |
1. पूसा बासमती 1609 (Pusa Basmati 1609)
उत्तर प्रदेश के बासमती उगाने वाले क्षेत्रों के लिए यह वैरायटी एक वरदान है। अक्सर बासमती में झोंका (Blast Disease) लगने से पूरी फसल बर्बाद हो जाती है, लेकिन इस वैरायटी में इस बीमारी से लड़ने की इन-बिल्ट क्षमता है।
- दाना: इसका दाना बहुत लंबा (7.87 mm) और अत्यधिक खुशबूदार होता है।
- फायदा: पकाने के बाद इसके दाने आपस में चिपकते नहीं हैं, जिससे बाजार में इसका बहुत ऊंचा रेट मिलता है।
2. पूसा बासमती 1728 (Pusa Basmati 1728)
अगर आपके इलाके में ‘जीवाणु झुलसा रोग’ (Bacterial Blight) का प्रकोप ज्यादा होता है, तो आपको पूसा बासमती 1728 का चयन करना चाहिए। यह वैरायटी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है।
- विशेषता: इसके अंदर
xa13औरXa21जैसे मजबूत जींस हैं जो बीमारी को पास भटकने नहीं देते। - फायदा: बीमारी न लगने के कारण कीटनाशकों का खर्च आधा हो जाता है।
3. पूसा बासमती 1637 (Pusa Basmati 1637)
वर्ष 2016 में रिलीज की गई यह वैरायटी मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के सिंचित (Irrigated) क्षेत्रों के लिए बनाई गई है।
- खासियत: यह अत्यधिक संक्रामक ब्लास्ट रोग के प्रति ‘हाईली रेजिस्टेंट’ (Highly Resistant) है।
- पैदावार: प्रति हेक्टेयर 4.20 टन की स्थिर पैदावार देने में सक्षम है।
4. पूसा 1592 (Pusa 1592)
यह एक गैर-बासमती (Non-Basmati) लेकिन अत्यधिक खुशबूदार और बारीक धान की किस्म है। जिन क्षेत्रों में पानी की अच्छी व्यवस्था है, वहां यह बंपर उत्पादन देती है।
- चावल की गुणवत्ता: इसकी ‘हेड राइस रिकवरी’ 58.2% है, यानी मिलिंग के समय इसके दाने टूटते नहीं हैं।
- उत्पादन: यह इस सूची में सबसे ज्यादा 4.73 टन प्रति हेक्टेयर तक की औसत पैदावार देती है।
5. पूसा बासमती 1718 (Pusa Basmati 1718)
यह किस्म उन किसानों के लिए बेस्ट है जो अंतरराष्ट्रीय बाजार की गुणवत्ता वाला बासमती उगाना चाहते हैं।
- दाना: इसका कच्चा दाना 8.1 mm का होता है, लेकिन पकने के बाद इसकी लंबाई 17.0 mm तक पहुंच जाती है, जो इसे सबसे प्रीमियम बासमती बनाता है।
- बीमारी से सुरक्षा: यह झुलसा रोग के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी है।
किसान पॉलिसी की सलाह (Kisan Policy Tip): किसी भी नई किस्म के बीज को खरीदने से पहले हमेशा अपने नजदीकी सरकारी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या प्रमाणित सहकारी समिति से ही संपर्क करें ताकि आपको नकली बीजों के धोखे से बचाया जा सके।

